बंगाल का अनोखा दृश्य, मुस्लिम महिलाएं चढ़ाती हैं मां दुर्गा को भोग

600 साल पुरानी कोड़ाखाकी दुर्गा पूजा जो की पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज की धार्मिक एकता का अद्भुत उदाहरण है. 

बंगाल के इस पूजा मंडप में मुस्लिम महिलाएं मां दुर्गा को भोग लगाती हैं और उनकी साज-सज्जा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

प्रचलित लोककथा के अनुसार लगभग 600 साल पहले मां दुर्गा ने मुस्लिम समुदाय के सदस्य को स्वप्न में कुछ खाना मांगा तब से इस पूजा की परंपरा की शुरुआत हुई.

मान्यता है कि एक समय में डाकू रघुनाथगंज इलाके के जंगल में दुर्गा पूजा का आयोजन करते थे.

जमींदार शरतचंद्र बंद्योपाध्याय को स्वप्न में मां का आदेश मिला कि पूजा उनके घर से शुरू हो और पहला भोग एक मुस्लिम परिवार से मिले.यहीं से यह परंपरा शुरू हुई

किवदंती है कि रघुनाथगंज की एक मुस्लिम विधवा चक्की चलाती थी. शरतचंद्र बंद्योपाध्याय ने उसे पहला भोग लगाने को कहा, पर गरीबी के कारण वह तैयार न हो सकी.

उसी रात देवी ने उन्हें स्वप्न में आदेश दिया कि वे भोग के रूप में कम से कम थोड़ा सा चावल लाएं और इसके अनुसार ही वे थोड़ा सा चावल इकट्ठा किये और नाडू बनाकर देवी दुर्गा को भोग लगाया.

इसी के साथ वहां पर पूजा में बाकी सभी चीजों के साथ चावल की चक्की को नाडू और साथ ही चावल, कटहल और गंगा हिल्सा  चढ़ाने की परंपरा है.

मुर्शिदाबाद में चावल को कोड़ा कहने से देवी का नाम कोड़ाखाकी दुर्गा पड़ा. यहां मुस्लिम महिलाएं शंख और पोल्का डॉट्स से मां को सजाती हैं, और उनकी उपस्थिति बिना पूजा अधूरी मानी जाती है.