Anant Chaturdashi के दिन घर में इन 14 जगहों पर जलाएं, मां लक्ष्मी कर देंगी मालामाल

अनंत चतुर्दशी का दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है. इस दिन अनंत सूत्र बाँधा जाता है और 14 दीपक जलाकर घर में शुभता और समृद्धि का आह्वान किया जाता है.

इस साल अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर को है. पूजा का शुभ समय सुबह 6:02 बजे से रात 1:41 बजे तक रहेगा. प्रदोष काल में विशेष पूजा और दीपक जलाने से अधिक फल मिलता है, इसलिए समय का ध्यान रखना जरूरी है.

चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र इस दिन की सबसे खास परंपरा है. इसे परिवार की रक्षा और प्रगति का प्रतीक माना जाता है. सूत्र बाँधते समय मन को शुद्ध और भावनाओं को सच्चा रखना ही सबसे बड़ा नियम है.

दीपक मिट्टी या पीतल के होने चाहिए और उनमें घी सर्वोत्तम माना जाता है. इन्हें प्रदोष काल में घर के अलग-अलग स्थानों पर रखकर पूर्वजों की स्मृति में प्रार्थना की जाती है, जिससे घर का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है.

पहला दीपक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने जलाया जाता है. दूसरा रसोई में रखा जाता है ताकि अन्न-समृद्धि बनी रहे. तीसरा तुलसी के पास जलता है और चौथा मुख्य द्वार पर रखा जाता है ताकि घर में शुभता का प्रवेश हो.

इसके बाद तिजोरी या धन स्थान पर दीपक जलाना समृद्धि का आशीर्वाद लाता है. एक दीपक बाथरूम के पास और एक पानी के नल के पास रखा जाता है, जबकि चार दीपक घर के चारों कोनों में रखकर पूरे घर को रोशनी और सकारात्मकता से भर दिया जाता है.

बारहवां दीपक पितरों के लिए घर से बाहर जलाया जाता है. तेरहवां दीपक सीढ़ियों पर रखा जाता है जो परिवार की तरक्की का प्रतीक है. चौदहवां दीपक आंगन या ब्रह्मस्थान में रखा जाता है जिसे घर का हृदय माना जाता है.

दीपक हमेशा सुरक्षित स्थान पर रखें और बच्चों की पहुँच से दूर रखें. अनंत सूत्र बाँधते समय साफ कपड़े और शुद्ध मन होना जरूरी है. इस दिन दान-पुण्य करना भी बेहद शुभ माना जाता है, चाहे वह अन्न हो, वस्त्र हो या जरूरतमंदों को भोजन कराना हो.

अनंत चतुर्दशी सिर्फ पूजा नहीं बल्कि नई शुरुआत और दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक है. श्रद्धा से किए गए 14 दीपक और अनंत सूत्र से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. इस दिन भक्ति और सच्चाई से पूजा करने पर अनंत फल मिलता है.