भारत के किन-किन मंदिरों पर चढ़ता है भगवान को जानवरों का मांस, जानें क्यों नहीं है कोई कानून

सावन का महीना शुरू हो गया है और इस महीने में ज्यादातर हिंदू मांस-मदिरा से परहेज करते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र महीने में मांस का सेवन करना गलत है

कामाख्या देवी मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना गया है तथा यह मंदिर दुनियाभर में तंत्र विद्या के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है. यहां माता के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए मांस और मछली अर्पित करते हैं

कोलकाता में स्थित कालीघाट मंदिर भी ऐसे ही मंदिरों में से एक है. यहां बकरे की बलि देते हैं और यही बकरे का मांस प्रसाद के रूप में बांटा जाता है

तमिलनाडु के मदुरई में स्थित मुनियांदी स्वामी मंदिर भी इनमें से एक हैं. इस मंदिर में भगवान मुनियांदी को प्रसाद के रूप में चिकन और मटन बिरयानी चढ़ाई जाती है

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में तरकुलहा देवी मंदिर में भी बकरे की बलि दी जाने की प्रथा है.  भक्त इस मंदिर में मनोकामना पूरी होने पर बकरे की बलि देते हैं और मंदिर का रसोइया मांस को मिट्टी के बर्तनों में पकाता है

कोलकाता का दक्षिणेश्वर काली मंदिर में भी काली माता को भोग के रूप में मछली अर्पित किया जाता है और इसे भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में बांटा जाता है

आपको बता दें कि इन मंदिरों में कानून इसलिए नहीं चलता क्योंकि भारतीय संविधान के अनुसार हर नागरिक को अपने आस्था और भक्ति का पालन करने का छूट है तथा मौलिक अधिकार में से एक हैं