हर भक्त के दिल में बसने वाले खाटू श्याम बाबा का नाम ‘लखदातार’ क्यों पड़ा, जानिए इस अनोखे नाम के पीछे की पौराणिक कहानी और आस्था से जुड़ी वजहें.
1 नवंबर को कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवउठनी एकादशी के दिन बाबा खाटू श्याम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है.
बाबा श्याम को कई नामों से जाना जाता है. ‘हारे का सहारा’, ‘शीश का दानी’, ‘मोरवीनंदन’, और सबसे लोकप्रिय नाम ‘लखदातार’. हर नाम उनके जीवन और आशीर्वाद की एक अनोखी कहानी कहता है.
‘लखदातार’ दो शब्दों से बना है. ‘लाख’ यानी लाखों और ‘दातार’ यानी दान देने वाला. बाबा श्याम अपने भक्तों को इतना देते हैं कि उनकी झोली भर जाती है, इसलिए उन्हें ‘लखदातार’ कहा जाता है.
माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से बाबा से कुछ मांगता है, श्याम बाबा उसे उसकी इच्छा से लाखों गुना अधिक आशीर्वाद देते हैं. उनकी करुणा और दानशीलता की मिसाल अनोखी है.
भक्तों का कहना है कि बाबा से मांगा हुआ कोई वरदान कभी अधूरा नहीं रहता. वो हर भक्त की झोली खुशियों से भर देते हैं बस सच्चे मन से पुकारना जरूरी है.
राजस्थानी भाषा में ‘लखना’ का मतलब होता है ‘समझ जाना’. कहा जाता है कि बाबा श्याम भक्तों की बात कहने से पहले ही ‘लख’ लेते हैं यानी उनके मन की हर बात जान जाते हैं.
भक्त को क्या चाहिए, वह किस दुख में है यह सब बाबा बिना बोले समझ जाते हैं. यही वजह है कि उन्हें ‘लख’ (जानने वाला) और ‘दातार’ (देने वाला) कहा जाता है.
‘लखदातार’ सिर्फ नाम नहीं, एक भाव है- भक्ति, विश्वास और दया का संगम. जो सच्चे मन से बाबा को पुकारता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता.