अहोई अष्टमी के दान से बच्चों के कष्ट होंगे कम. जानें
अहोई अष्टमी के दिन व्रत और पूजा-पाठ के साथ-साथ दान करने का भी बहुत महत्व होता है.
माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा-पाठ के साथ-साथ दान करने से संतान के जीवन की सारी तकलीफें, दुख और मुसीबतें दूर हो जाती हैं.
महिलाएं हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ये व्रत रखती हैं. साथ ही माता अहोई की विधिवत पूजा करती हैं.
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को रखने से महिलाएं अपनी संतान के लिए लंबी आयु और सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं.
अहोई अष्टमी के दिन व्रती महिलाओं को चावल, गेहूं, दाल आदि का दान करना चाहिए.
इस दिन व्रती महिलाओं को गरीबों को वस्त्र दान और जरूरतमंदों को धन का दान करना चाहिए.
व्रती महिलाओं को फल और मिठाई साथ ही जरूरतमंदों को भोजन भी करा सकती हैं.
इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा.
अहोई अष्टमी के व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 53 मिनट पर शुरू होकर 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा.