गोवर्धन पूजा: ये है सही विधि, भूलकर भी न करें ये गलतियां
हर साल दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है. इसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है.
भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था.
इस दिन भगवान कृष्ण, गायों और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है. साथ ही विभिन्न अनुष्ठान किए जाते हैं.
गोववर्धन पूजा के दिन पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों के साथ कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी आवश्यक होता है.
इस दिन घर के आंगन या मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर कृष्ण की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए.
56 भोग या अन्नकूट तैयार कर उसे भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज को चढ़ाना चाहिए.
गाय की पूजा करके उसे हरा चारा खिलाना चाहिए, साथ ही गोवर्धन पर्वत की बनाई गई आकृति की सात बार परिक्रमा लगानी चाहिए.
गोवर्धन पूजा के दिन और इससे पहले आने वाली अमावस्या को तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए.
पेड़-पौधे को काटने से बचना चाहिए और घर में तामसिक भोजन नहीं बनाना चाहिए. इस दिन मांस, मंदिरा और अन्य तामसिक भोजन खाना भी नहीं चाहिए.