होलिका दहन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि मौसम बदलाव के साथ अच्छी सेहत का भी पर्व है. यह ऋतुओं का संधिकाल है, जब ठंड जा रही है और गर्मी आने लगती है.
होलिका जलने की कथा है कि लाखों साल पहले- भगवान विष्णु ने प्रह्लाद की रक्षा की थी, इसलिए अग्नि को पवित्र मानकर सावधानी से परिक्रमा कर आशीर्वाद लिया जाता है.
ठीक वैसे ही जैसे घर में खाना बनाकर पहले भगवान को भोग लगाते हैं, वैसे ही किसान नई फसल होलिका में चढ़ाकर खुशियां मनाते हैं.