हिंदू धर्म में नवरात्रि के व्रत के बाद कन्या पूजन को बहुत महत्वपूर्ण और विशेष माना जाता है.
कन्या पूजन नवरात्रि के आठवें दिन (अष्टमी) को विशेष रूप से किया जाता है.माना जाता है कि इस दिन कन्याओं की सेवा करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है.
कन्या पूजन करना नवरात्रि के व्रत के बाद जरूरी होता है, ऐसा करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में धन, स्वास्थ्य और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है.
परंपरा के अनुसार 9 कन्याओं को आमंत्रित करना सर्वोत्तम माना गया है जो कि मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक है.
9 कन्याओं हो सके तो 3 या 5 कन्याओं को बैठाना भी शुभ माना जाता है. कन्याओं की उम्र 2 से 10 वर्ष के बीच होनी चाहिए.
कन्या पूजन के दिन सुबह स्नान के बाद साफ और स्वच्छ कपड़ पहनना चाहिए साथ ही पूजा स्थल को साफ कर, माता की मूर्ति के सामना दीपक जलाकर फूल अर्पित करके आरती करनी चाहिए.
कन्याओं का स्वागत पैर धोकर करना चाहिए.फिर बैठक पर बिठाकर हल्दी, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करनी चाहिए.
कन्याओं को कुछ पैसे, मिठाई या कपड़े भेंट कर उनकी प्रिय चीजें दें इससे घर में लक्ष्मी और दुर्गा का विशेष आशीर्वाद माना जाता है.
कन्या पूजन अष्टमी के दिन प्रातःकाल और पूर्व या उत्तर दिशा में पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है.