दक्षिण भारत में पूजे जाते हैं राजा बलि, जानें अद्भुत कथा
दक्षिण भारत में दिवाली के अवसर पर एक विशेष पूजा होती है, जो एक ऐसे महान राजा को समर्पित है.
दक्षिण भारत में दिवाली के अवसर पर विशेष रूप से राजा बलि की पूजा की जाती है, जो उनकी दानशीलता और विनम्रता की याद दिलाती है.
राजा बलि की कथा हमें सिखाती है कि धन और शक्ति का सही उपयोग दूसरों के भले और समाज की भलाई के लिए करना चाहिए.
बलि राजा हमेशा अपनी प्रजा और दूसरों की भलाई में तत्पर रहते थे और कभी भी धन या अधिकार को अपने लिए संकुचित नहीं करते थे.
एक दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और बलि से तीन पग भूमि मांग ली.
राजा बलि ने अपने दान का महत्व समझते हुए बिना किसी हिचकिचाहट के पूरा राज्य भगवान को दे दिया.
उनकी दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक में शासन करने का वरदान दिया और कहा कि वे हर वर्ष एक दिन पृथ्वी पर अपनी प्रजा से मिलने आएंगे.
माना जाता है कि बलि राजा हर वर्ष अपनी प्रजा से मिलने और उनका आशीर्वाद लेने पृथ्वी पर आते हैं.
इस दिन लोग बलि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाते हैं, मिठाई चढ़ाते हैं और उनकी महिमा का स्मरण करते हैं.