महाशिवरात्रि 2026: शिव पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? जानें 10 खास बातें

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने केतकी को शाप दिया था, इसलिए शिव पूजा में केतकी का फूल वर्जित माना जाता है.

तुलसी भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की प्रिय हैं, लेकिन कथा के अनुसार देवी तुलसी ने स्वयं को शिव पूजा के लिए वर्जित किया था.

आमतौर पर शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती, क्योंकि यह स्त्रियोचित वस्तु मानी जाती है. हालांकि विवाह की कामना से हल्दी अर्पित की जा सकती है.

भगवान गणेश की प्रिय दूर्वा शिवलिंग पर भी चढ़ाई जा सकती है. मान्यता है कि इससे भय और संकट दूर होते हैं.

शिव पूजा बिल्व पत्र के बिना अधूरी मानी जाती है. नए पत्ते न मिलें तो धोकर पुनः अर्पित किए जा सकते हैं.

शमी शिवलिंग और गणेश जी को चढ़ाना शुभ माना गया है. बिल्व पत्र के साथ शमी पत्र अर्पित करना लाभकारी है.

धतूरा शिव जी को अति प्रिय है. इसके फूल और पत्ते चढ़ाने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं. आंकड़े के फूलों की माला शिवलिंग पर चढ़ाई जाती है. इसके पत्ते भी अर्पित किए जा सकते हैं.

पीपल के पत्तों पर श्रीराम नाम लिखकर शिव जी और हनुमान जी को अर्पित करना शुभ माना गया है.

हर सुबह शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाकर बिल्व पत्र और अन्य पवित्र पत्तों से पूजा करें, इससे भगवान शिव की कृपा बनी रहती है.