जानें, रात में विवाह को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र. क्या मुगलों की वजह से हुई थी शुरुआत?
शास्त्रों के अनुसार विवाह दिन में करना अधिक शुभ माना गया है, लेकिन भारत में रात में विवाह की परंपरा कैसे शुरू हुई, यह सवाल अक्सर उठता है
पुराणों और वेदों में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही विवाह को श्रेष्ठ बताया गया है
रात्रिकाल को शास्त्रों में तमसिक प्रकृति का समय माना गया है, और इसलिए इसे विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अनुचित समझा गया है
हालांकि, इतिहासकारों का मानना है कि मुगल शासनकाल में जब हिंदू समाज पर धार्मिक और सामाजिक प्रतिबंध लगे, तब रात में विवाह करने की परंपरा शुरू हुई ताकि समारोह गुप्त रूप से संपन्न हो सके.
आज यह परंपरा सुविधा और सामाजिक स्वीकार्यता के कारण जारी है.
मगर इसकी जड़ें ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों पहलुओं से जुड़ी हैं