रावण दहन ही नहीं, बल्कि शमी पूजन भी है विजय और सौभाग्य का रहस्य! जानें
दशहरा यानी विजयादशमी जिस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर धर्म की रक्षा की थी.लेकिन यह दिन सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं है.
दशहरे के दिन शमी वृक्ष की पूजा भी कि जाती है. धर्म, पुराण और ज्योतिष के अनुसार शमी पूजन बेहद शक्तिशाली और फलदायी बताया गया है.
शमी की महत्ता महाभारत काल से जुड़ा है. पांडव अज्ञातवास पर निकले तो उन्होंने अपने सभी शस्त्र एक शमी के पेड़ में छिपा दिए थे परंतु जब वे लौटे तो उनके शस्त्र वैसे ही सुरक्षित मिले और शमी को शक्ति और विजय का प्रतीक माना गया.
मान्यता है कि शमी के पत्ते असली सोने के समान शुभ होते हैं इसलिए शमी वृक्ष के पत्ते आपस में बांटने की परंपरा कई राज्यों में प्रचलित है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शमी वृक्ष शनि ग्रह का प्रिय है. दशहरे पर शमी की पूजा करने से शनि दोष शांत होता है साथ ही करियर और व्यापार में आ रही रुकावटें भी दूर होती है.
शमी पूजन करने से शत्रु बाधा और संकटों से मुक्ति है और साथ ही शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव का नाश होता है जिससे घर में सुख-शांति और सौभाग्य की वृद्धि होती है.
शमी पूजन से धन और समृद्धि की प्राप्ति के साथ कार्यक्षेत्र और व्यापार में सफलता मिलती है और हर क्षेत्र में विजय और न्याय की प्राप्ति होती है.
प्रचलीत है कि रावण ने भी लंका में शमी वृक्ष की पूजा की थी जिस कारण इसे युद्ध और विजय से जोड़ा जाता है.
दशहरा सिर्फ बुराई पर अच्छाई की जीत ही नहीं बल्कि शक्ति और समृद्धि का प्रतिक भी है. इस दिन शमी पूजन से शत्रु पर विजय, शनि दोष का नाश और धन की प्राप्ति होती है इसलिए दशहरे पर इसकी पूजा करना शुभ और आवश्यक माना गया है.