Parivartini Ekadashi क्‍या है, इस दिन कथा सुनना क्‍यों जरूरी, पढ़िए राजा बलि का प्रसंग -

आप जानते हैं कि परिवर्तिनी एकादशी क्‍या है और इस दिन व्रत रखना एवं राजा बलि की कथा सुनना क्‍यों जरूरी है? आज हम यहां आपको बताएंगे- 

हिंदू अनुयायियों में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी जो आती है, उसे ही परिवर्तिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है. 

पौराणिक मान्‍यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं.

इस एकादशी पर राजा बलि की कथा सुनी जाती है, इस दिन भगवान विष्‍णु की पूजा का विशेष महत्‍व है. इसकी कथा सुनने से लोगों के पाप नष्‍ट होते हैं. 

महत्वः इस एकादशी पर व्रत करने से तीनों लोकों में सम्मान मिलता है, पापों से मुक्ति और श्री हरि की दिव्य कृपा मिलती है. 

Parivartini Ekadashi katha: कथा का आरंभ इस प्रकार होता है कि राजा युधिष्ठिर भगवान कृष्ण से परिवर्तिनी एकादशी का महत्व पूछते हैं. तब कृष्ण ने कहते हैं कि यह व्रत सभी पापों का नाश करता है और अक्षय फल देता है. 

राजा बलि की कथा: शक्तिशाली दैत्‍य राजा बलि ने देवताओं को हराकर इंद्रलोक जीत लिया था. देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने वामन रूप धरा. 

वामन ने तीन पग भूमि दान में मांगी, जिसमें उन्‍होंने पहले पग से पृथ्वी, दूसरे से स्वर्गलोक को नाप लिया. तीसरे पग के लिए जगह न होने पर राजा बलि ने अपना सिर झुकाया. 

1तब वामन ने तीसरा पग राजा बलि के सिर पर रखा और उन्हें पाताल लोक पहुंचा दिया. बलि की भक्ति और विनम्रता से वामन बहुत प्रसन्‍न हुए और विष्णु रूप में दर्शन दिए.