Sawan Chaturdashi: शुभ योगों में करें वरलक्ष्मी व्रत और हयग्रीव पूजन, होगी हर इच्छा पूरी
इस बार सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी शुक्रवार को पड़ रही है, जिसमें वरलक्ष्मी व्रत और हयग्रीव जन्मोत्सव एक साथ मनाए जाएंगे. यह दिन आध्यात्मिक रूप से बहुत खास है.
दृक पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि दोपहर 2:12 बजे तक रहेगी और उसके बाद पूर्णिमा शुरू हो जाएगी. सूर्योदय सुबह 5:46 और सूर्यास्त शाम 7:07 बजे होगा.
इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र दोपहर 2:28 बजे तक रहेगा, फिर श्रवण नक्षत्र शुरू होगा. चंद्रमा मकर राशि में रहेगा और दिन भर शुभ योग बनेंगे.
शुक्रवार को दोपहर 2:28 से अगले दिन सुबह 5:47 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा, जो व्रत और पूजा के लिए बहुत ही उत्तम समय माना गया है.
वरलक्ष्मी व्रत लक्ष्मी जी के एक रूप की पूजा का पर्व है. देवी वरलक्ष्मी धन, संतान और सुख-समृद्धि देने वाली मानी जाती हैं. ये व्रत खासतौर पर विवाहित महिलाएं करती हैं.
पूजन विधि में देवी का ध्यान कर पंचामृत स्नान कराएं, फिर वस्त्र, इत्र, सिंदूर और फूल अर्पित करें. मिठाई चढ़ाएं, दीप जलाएं और आरती करें.
वरलक्ष्मी व्रत में एक खास धागा (दोरक) भी बांधा जाता है, जो माता की कृपा का प्रतीक होता है. इसे पूरे भक्ति भाव से करना चाहिए.
इसी दिन भगवान विष्णु के अवतार हयग्रीव का भी जन्मदिन मनाया जाता है. उन्होंने ही वेदों को असुर से वापस लाकर धर्म की रक्षा की थी.
इस विशेष दिन, श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों की कृपा मिलती है. जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.