जानें, सावन के दूसरे सोमवार पर कामिका एकादशी का संयोग
सावन मास का प्रत्येक सोमवार अत्यंत पावन और भगवान शिव को समर्पित होता है, वहीं कामिका एकादशी विष्णु भगवान को प्रसन्न करने का उत्तम दिन माना जाता है
जब ये दोनों शुभ तिथियां एक साथ पड़ती हैं, तो यह विशेष संयोग अत्यंत फलदायी होता है
ऐसे शुभ दिन पर कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि पुण्य का लाभ पूर्ण रूप से प्राप्त हो और अनजाने में कोई दोष न लगे
कामिका एकादशी पर व्रत रखने वाले भक्तों को इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए. व्रत में सात्विक और फलाहारी भोजन ही करना चाहिए
सावन और एकादशी दोनों ही तिथियों पर तामसिक भोजन जैसे लहसुन-प्याज का प्रयोग अशुद्ध माना जाता है. इससे पूजा का पुण्य फल कम हो जाता है
इन पावन दिन पर मन को शांत और स्थिर रखना चाहिए. क्रोध, वाणी का अपमान या किसी से झगड़ा करना व्रत और पूजा का प्रभाव घटा देता है
सावन के सोमवार को शिवजी की विशेष पूजा होती है, लेकिन ध्यान रखें कि तुलसी के पत्ते शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित है. यह शास्त्रों के अनुसार एक दोष माना जाता है
एकादशी पर चावल खाना वर्जित माना गया है तथा सावन मास में जल को विशेष पवित्र माना गया है. इस दिन गंगा जल को अपवित्र करना एक दोष माना जाता है
इस दिन भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, गंगाजल आदि चढ़ाया जाता हैं और विष्णु भगवान को तुलसी, पंचामृत आदि चढ़ाया जाता हैं