Shardiya Navratri: नवरात्र में क्यों हैं जौ बौने की परंपरा, जाने इसके पीछे की मान्यता
आज से नवरात्र शुरू हो चुका है, जो जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित है. नवरात्र के 9 दिनों हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता हैं.
इस पर्व में मां दुर्गा के 9 रुपों की पूजा अराधना की जाती है जिससे हर मनोकामना पूरी होती है, साथ ही जीवन में सुखों का समावेश होता है.
इन नवरात्र के दिनों में भक्तगण व्रत रखकर मां दुर्गा से शक्ति, साहस, समृद्धि और सुख-शांती के लिए कामना करते है.
हिंदू धर्म के अनुसार इन दिनों में मां दुर्गा की आराधना करने से घर में शांती और सकारात्मक उर्जा का वातावरण बना रहता है. साथ ही धन-धान्य और खुशहाली भी आती है.
इस नवरात्र के पहले दिन यानी की जिस दिन कलश की स्थापना की जाती है उसी दिन कलश के साथ जौ बोने की परंपरा है, जिसको लेकर आध्यात्मिक और पौराणिक मान्यताएं है.
ऐसा माना जाता है की जौ अनाज का पहला और शुभ रुप है, जो एक खाद्य सामग्री होने के साथ-साथ समृद्धि, जीवनशक्ति और उर्वरता का प्रतीक है.
ये इस बात का प्रतीक है कि घर में आने वाला वर्ष सुख-शांति, समृद्धि और आर्थिक स्थिरता से भरा रहे.
अगर जौ स्वस्थ तेजी से अंकुरित होते हैं, तो यह पूरे वर्ष के लिए एक अच्छा संकेत माना जाता है, जो परिवार में सफलता, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा लाता है.
वहीं अगर इनके विकास में कोई रुकावट आती है, तो इसे भविष्य में आने वाली चुनौतियों और समस्याओं का संकेत माना जाता है.