पितरों को प्रसन्न करने के खास उपाय, जानें श्राद्ध में तिल, कौआ और कुत्ते का महत्व

श्राद्ध में काले तिल का बहुत महत्व है. माना जाता है कि काले तिल से तर्पण करने पर पितृ तृप्त होते हैं और आशीर्वाद देते हैं.

गरुड़ पुराण में भगवान कृष्ण ने कहा है कि तिल उनके पसीने से उत्पन्न हुए हैं. इसीलिए तर्पण में तिल को बेहद पवित्र माना जाता है.

काले तिल काल के प्रतीक माने जाते हैं. मान्यता है कि एक तिल का दान 32 सेर सोने के दान के बराबर फल देता है.

तिल दान से संतान प्राप्ति होती है और शनि-राहु जैसे दोषों का निवारण होता है. श्राद्ध पक्ष में यह बहुत शुभ माना जाता है.

श्राद्ध में कौए को भोजन कराना भी जरूरी माना जाता है. कौआ यम का दूत कहलाता है और पितरों की याद दिलाता है.

ग्रामीण मान्यता है कि यदि कौआ सिर पर बैठ जाए तो संकट की आशंका मानी जाती है. लेकिन श्राद्ध में उसे भोजन देने से पितृ प्रसन्न होते हैं.

कुत्ता भैरव बाबा की सवारी है और यम का प्रतीक भी. कुत्ते को भोजन देने से पितृ जहां कहीं भी हों, उनकी सुरक्षा होती है.

ज्योतिष के अनुसार जन्मपत्री में केतु की पीड़ा होने पर कुत्ते की सेवा और भोजन कराने से दोष दूर होते हैं और अचानक शुभ परिवर्तन आते हैं.

श्राद्ध में तिल, कौए और कुत्ते को भोजन देने से अकाल मृत्यु का भय टलता है और पितरों के आशीर्वाद से रुके काम पूरे होते हैं.