धनतेरस से जुड़ी यह लोक कथा बताती है समृद्धि का रहस्य. जानें

हर साल कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है.

भगवान धन्वंतरि का पूजन धनतेरस के दिन मुख्य रूप से किया जाता है. इसी के साथ धनतेरस पर मां लक्ष्मी के पूजन का भी विधान है.

भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर भ्रमण करने का निश्चय किया. उनके साथ माता लक्ष्मी ने साथ चलने की इच्छा जताई.

विष्णु जी ने कहा कि अगर लक्ष्मी उनके साथ चलना चाहती हैं तो उनकी हर बात माननी होगी. माता ने सहमति दी.

पृथ्वी पर आने के बाद माता लक्ष्मी को सरसों का खेत दिखा. उन्होंने वहीं श्रृंगार किया और गन्ने का रस पिया.

भगवान विष्णु ने उन्हें देख लिया और आज्ञा न मानने पर क्रोधित होकर 12 साल किसान के घर रहने का श्राप दिया.

माता लक्ष्मी के आशीर्वाद से किसान का घर धन-धान्य से भर गया और उसके जीवन में खुशहाली आ गई.

बारह साल बाद भगवान विष्णु माता को लेने आए तो किसान ने उन्हें विदा करने से मना कर दिया.

माता ने कहा तेरस के दिन घर साफ करो, दीप जलाओ और कलश में धन रखकर पूजा करो. तभी से धनतेरस की परंपरा शुरू हुई.