रामायण के 10 सबसे शक्तिशाली योद्धा, जिनसे कांपते थे दुश्मन
श्री राम बहुत बड़े धनुर्धर थे. उन्होंने अकेले ही खर-दूषण जैसे राक्षसों की विशाल सेना का अंत किया और लंकापति रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी.
हनुमान जी के पास असीमित बल था. उन्होंने अकेले ही पूरी लंका को जलाकर राख कर दिया और युद्ध में रावण की सेना की रीढ़ तोड़ दी थी.
श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण अत्यंत पराक्रमी और क्रोध के धनी थे. उन्होंने युद्धभूमि में रावण के सबसे शक्तिशाली और मायावी पुत्र इंद्रजीत का वध किया था.
ब्रह्मा जी के वरदानों के कारण रावण लगभग अजेय था. उसने यमराज और इंद्र सहित कई देवताओं को हराया था. उसे परास्त करना केवल भगवान राम के ही वश में था.
रावण का पुत्र मेघनाद ने देवराज इंद्र को बंदी बनाया था और वह आसमान में अदृश्य होकर युद्ध करने की खतरनाक मायावी विद्या जानता था.
कुंभकर्ण इतना विशाल और बलशाली था कि उसके कदमों की थाप से धरती कांपती थी. युद्धभूमि में उसने वानर सेना में हाहाकार मचा दिया था, जिसका वध स्वयं श्री राम ने किया.
किष्किंधा के राजा बाली को वरदान था कि सामने वाले शत्रु की आधी शक्ति उसमें समा जाएगी. इसी बल से उसने रावण को छह महीने तक अपनी कांख में दबाकर रखा था.
रावण का दूसरा पुत्र अतिकाय इतना शक्तिशाली था कि उसे साधारण अस्त्रों से मारना नामुमकिन था, जिसका वध लक्ष्मण ने ब्रह्मास्त्र से किया.
बालीपुत्र अंगद ने रावण की सभा में अपना पैर जमाकर लंका का घमंड तोड़ा दिया था, वहीं सूर्यपुत्र सुग्रीव ने अपनी वानर सेना के साथ लंका युद्ध में कई बड़े राक्षस योद्धाओं का अंत किया.