मां दुर्गा को चने, हलवे और पूरी का भोग क्यों लगाया जाता है? जानें वजह

नवरात्र की महाष्टमी या नवमी को कन्या पूजन का विधान है. इसी दिन मां को भोग स्वरूप खास पदार्थ अर्पित किए जाते हैं.

स्कंद पुराण और देवी भागवतम् में लिखा गया है कि देवी चना पसंद करती हैं. यह न केवल शुद्ध और पौष्टिक अनाज है, बल्कि इसे अर्पित करने से भक्त को शक्ति और ऊर्जा की प्राप्ति होती है.

देवी को अन्न का भोग अर्पित करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे स्वयं संपूर्ण सृष्टि की शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक हैं.

हलवा देवी का प्रिय मीठा भोग माना जाता है. भविष्य पुराण और मार्कण्डेय पुराण में इस भोग का जिक्र है.

हलवे का स्वाद सुख, समृद्धि और संतोष का प्रतीक है. नवरात्रि या किसी भी विशेष पूजा में हलवा देवी को अर्पित करना घर में शांति और आनंद लाने वाला माना जाता है.

पूरी अर्पित करने का अर्थ भक्ति की पूरी स्वीकृति, भक्त का उत्साह और सेवा भाव है.हलवे के साथ पूरी देना यह भी दर्शाता है कि भोग स्वादिष्ट, संतुलित और पोषणयुक्त हो.

चना शक्ति, ऊर्जा और स्वास्थ्य का, हलवा सुख, समृद्धि और मीठे फल का, तो पुरी भक्ति, उत्साह और सेवा भाव का प्रतीक है.

देवी को यह भोग अर्पित करना केवल भोजन अर्पित करना नहीं है, बल्कि यह भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक भी है.

इस परंपरा को अपनाने से घर और मन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है.