क्यों की जाती है चित्रगुप्त की पुजा? जानें महत्व

भाई दूज के दिन चित्रगुप्त पूजा का विधान सनातन धर्म के शास्त्रों में किया गया है.

हर साल कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान चित्रगुप्त की का पूजन किया जाता है.

चित्रगुप्त जी मृत्यु के देवता, यमराज जी के सहायक के रूप में जाने जाते हैं.

इस दिन कलम और दावात की भी पूजा की जाती है. इसी कारण इस दिन को मस्याधार (कलम और दावात) पूजा भी कहा जाता है. 

ब्रह्मा जी के चित्त से जन्मे चित्रगुप्त को यमराज के सहायक के साथ देवताओं के लेखपाल भी कहा जाता है.

भाई दूज पर यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने भाइयों को अकाल मृत्यु से बचने का वरदान दिया. 

चित्रगुप्त यमराज के सहायक हैं  इसलिए इस दिन उनकी भी पूजा होती है.  

भगवान चित्रगुप्त कलम-दवात की सहायता से समस्त जीवों के कर्मों लेखा-जोखा रखते हैं.

इस दिन चित्रगुप्त जी की पूजा करने वालों को विद्या, बुद्धि, साहस और लेखन का आशीर्वाद प्राप्त होता है.