हरतालिका तीज पर क्यों किया जाता है व्रत, जानिए पौराणिक कथा
हर साल सावन के महीने में आने वाली हरतालिका तीज महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दिन महिलाएं माता पार्वती की भक्ति में लीन होकर अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं
इस बार हरतालिका तीज का पर्व सावन मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि से चतुर्थी तिथि में परिवर्तित हो रहा है, जिससे पूजा के समय को लेकर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत की शुरुआत माता पार्वती ने अपने पति शिव जी को प्राप्त करने के लिए की थी
हरतालिका तीज पर व्रत का महत्व इतना है कि इसे करने से न केवल पति की लंबी उम्र होती है, बल्कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि भी बनी रहती है
विशेष बात यह है कि इस साल हरतालिका तीज पर चतुर्थी तिथि दोपहर से लग रही है
इसका मतलब यह हुआ कि सुबह की पूजा तृतीया तिथि में होगी और दोपहर के बाद चतुर्थी तिथि लगने के कारण कई स्थानों पर पूजा-अर्चना का समय प्रभावित हो सकता है
इसलिए ज्योतिषाचार्यों और पुराणों के अनुसार इस दिन पूजा करना चाहिए और समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए
पंडितों का कहना है कि सुबह-सवेरे तृतीया तिथि में ही व्रत शुरू करना शुभ माना जाता है. पूजा में पारंपरिक विधि के अनुसार माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर, जल, फूल, अक्षत और फल अर्पित किए जाते हैं
हरतालिका तीज का यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक रूप से भी महिलाओं को अपने परिवार और रिश्तों के प्रति जागरूक और समर्पित रहने की प्रेरणा देता है