युधिष्ठिर का वो श्राप, जिसे आज तक झेल रही हैं महिलाएं
महाभारत का युद्ध सिर्फ लड़ाई नहीं था, बल्कि उस काल में कई घटनाएं ऐसी हुईं जिनका असर आज भी माना जाता है. ऐसी ही एक घटना है युधिष्ठिर द्वारा अपनी मां कुंती को दिया गया श्राप.
पांडवों और कौरवों के बीच महाभारत का युद्ध हुआ. पांच पांडवों में सबसे बड़े असल में कर्ण थे, लेकिन उनका पालन-पोषण दूसरे परिवार में हुआ.
कर्ण और अर्जुन का युद्ध महाभारत का सबसे भीषण युद्ध माना जाता है. इस द्वंद्व में अर्जुन ने कर्ण को परास्त कर दिया.
युद्ध खत्म होने के बाद कुंती रणभूमि में पहुंचीं और कर्ण का शव गोद में लेकर रोने लगीं. उन्हें देखकर सभी पांडव हैरान रह गए.
युधिष्ठिर ने आश्चर्य से पूछा- "मां, आप हमारे शत्रु की मौत पर इतना विलाप क्यों कर रही हैं?"
तब कुंती ने सच बताया- “कर्ण तुम्हारा ही सबसे बड़ा भाई था. उसका जन्म मेरे गर्भ से हुआ था.”
ये सुनकर युधिष्ठिर का दिल टूट गया. उन्हें लगा कि अगर यह सच पहले पता होता, तो युद्ध की दिशा ही बदल जाती.
गुस्से और दुख में डूबे युधिष्ठिर ने अपनी मां को श्राप दे दिया- “आज के बाद कोई भी स्त्री अपने पेट में कोई बात नहीं छिपा पाएगी.”
मान्यता है कि युधिष्ठिर का यह श्राप आज भी प्रभावी माना जाता है, और इसी वजह से कहा जाता है कि महिलाएं बात ज़्यादा देर तक छिपा नहीं पातीं.