वट सावित्री व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें शास्त्रों के नियम!
वट सावित्री व्रत मुख्य रूप से निर्जला होता है, लेकिन सेहत खराब होने या गर्भावस्था में पानी पीने की पूरी छूट है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री व्रत मुख्य रूप से निर्जला (बिना अन्न-जल के) रखा जाता है.
जो महिलाएं शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं, उन्हें पूजा और पारण तक निर्जला व्रत ही रखना चाहिए.
यदि कोई महिला बीमार है, कमजोर है या दवा खाती है, तो वह व्रत में पानी या जूस पी सकती है.
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को निर्जला नहीं रहना चाहिए. वे शिशु की सेहत के लिए पानी और दूध ले सकती हैं.
अगर शरीर साथ न दे, तो जबरदस्ती भूखे न रहें. अपनी परंपरा के अनुसार फल या दूध खाकर भी व्रत किया जा सकता है.
निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को बरगद की पूजा, परिक्रमा, कथा और दान-पुण्य करने के बाद ही जल लेना चाहिए.
पूजा के बाद माता सावित्री का ध्यान करें. सबसे पहले जल पीकर और कुछ मीठा खाकर ही अपना व्रत खोलें.
व्रत खोलने के बाद अपनी सास या घर की बुजुर्ग महिलाओं को सुहाग का 'बायना' दें और उनका आशीर्वाद लें.
शास्त्रों में सेहत को सबसे बड़ा धर्म माना गया है. मजबूरी में पानी पीने पर मन में कोई अपराधबोध न रखें.