राजधानी के तमाम फ्यूल पंप्स पर हाईटेक कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे और सरकार के डेटाबेस से जुड़े होंगे,जिससे गाड़ी की उम्र पहचान में आ जाएगी.
दिल्ली सरकार ने सभी फ्यूल स्टेशन को इस नियम के पालन के लिए SOP (Standard Operating Procedure) भेजी है.
फ्यूल पंप्स पर बड़े-बड़े बोर्ड लगाए जाएंगे, जिसमें लिखा होगा कि “पुराने वाहनों को फ्यूल नहीं मिलेगा."
अगर कोई पुरानी गाड़ी का मालिक जबरदस्ती फ्यूल लेने की कोशिश करता है या गलत जानकारी देकर सिस्टम को धोखा देता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.
ट्रांसपोर्ट विभाग की टीम ऎसे मौके पर वाहन को सीज कर भारी जुर्माना भी लगा सकती है, और अगर वाहन का मालिक फिर भी नियम तोड़ेगा, तो वाहन को स्क्रैप करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी.
दिल्ली के बाद यह नियम 1 नवंबर से NCR क्षेत्र गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा और सोनीपत जैसे इलाकों में भी लागू होंगे.
1 अप्रैल 2026 से बाकी सभी NCR जिलों में भी इसे अनिवार्य कर दिया जाएगा. अनुमान है कि सिर्फ दिल्ली में ही करीब 62 लाख वाहन इस नीति से प्रभावित होंगे.