आधी रात को ही अंग्रेजों ने क्यों सौंपी थी सत्ता? लॉर्ड माउंटबेटन से है कनेक्शन
भारत कल अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस (Independence Day 2025) मनाने जा रहा है. ये दिन हमारे देश का गर्व और आजादी का प्रतीक है.
लेकिन क्या आप जानते हैं 14 और 15 अगस्त की रात आखिर ऐसा क्या हुआ था जिसकी वजह से अंग्रेजों ने भारत को आधी रात को ही सत्ता सौंप दी थी? चलिए जानते हैं उस आधी रात की कहानी के बारे में.
14–15 अगस्त 1947 की रात, भारत ने लगभग 200 साल की गुलामी के बाद आज़ादी का स्वागत किया. यह सिर्फ एक रात नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के पुनर्जन्म का क्षण था.
दिल्ली में उस शाम हर तरफ उत्साह और चिंता का मिला-जुला माहौल था. बंटवारे का दर्द और हिंसा की आशंका के बीच आज़ादी का जोश चरम पर था.
रात 11 बजे कॉन्स्टिट्यूशन हॉल (आज का संसद का सेंट्रल हॉल) में ऐतिहासिक बैठक शुरू हुई. बाहर बारिश हो रही थी, फिर भी हजारों लोग इस पल को देखने के लिए जमा हुए.
शाम 6 बजे ही ब्रिटिश झंडा ‘यूनियन जैक’ उतार दिया गया था. पूरे देश में तिरंगा फहराने की तैयारियां जोरों पर थीं.
इसके बाद ठीक रात 12 बजे पंडित नेहरू ने “Tryst with Destiny” भाषण दिया—“जब दुनिया सो रही थी, भारत जाग उठा.” इसने देशवासियों के दिलों में उम्मीद और जोश भर दिया.
ब्रिटिश सरकार ने औपचारिक रूप से सत्ता भारत को सौंपी. पंडित नेहरू ने लॉर्ड माउंटबेटन से ‘सेंगोल’ ग्रहण किया—स्वतंत्र भारत की शुरुआत का प्रतीक.
जहां एक तरफ दिल्ली और देश में जश्न था, वहीं पंजाब और बंगाल में विभाजन की हिंसा भड़की हुई थी. लाखों लोग घर छोड़कर भाग रहे थे.
महात्मा गांधी इस जश्न में शामिल नहीं हुए थे क्योंकि वे विभाजन की पीड़ा में अनशन पर थे और हिंसा रोकने के लिए देश के दूसरे हिस्से में डटे थे.
देश को आधी रात का समय इसलिए चुना गया क्योंकि दिन में दंगे भड़कने का डर था. इसके अलावा पाकिस्तान को एक दिन पहले यानी 14 अगस्त आज़ादी मिली थी और वाइसराय लॉर्ड माउंटबेटन को दोनों जगह मौजूद रहना था.
ब्रिटिश सरकार की घोषणा के अनुसार, स्वतंत्रता का समय 15 अगस्त की जीरो आवर तय था. यही कारण है कि आधी रात को नई दिल्ली में भारत की आजादी का ऐलान हुआ.