फ्रांस की एक ऐसी मोटर रेस जो ले आयी दुनिया में क्रांति

130 साल पहले पेरिस की एक रेस ने बदल दी थी दुनिया की रफ्तार, चलिए जानते हैं उस दिन की हैरान कर देने वाली कहानी.

पहली मोटर रेस आयोजित हुई दुनिया में पहली बार मोटर रेस फ्रांस में आयोजित की गई थी. उस रेस में कुल 21 मोटर वाहनों ने हिस्सा लिया. इस रेस को कराने वाले पियरे गिफार्ड ने इसे तकनीक की क्रांति बताया था

पहली बिना घोड़े- गाड़ियों की  हुई प्रतियोगिता पियरे ने 9 दिसंबर 1993 Le Petit Journal के अंक में ‘जीन सैंस टेरे’ नाम से लेख लिखकर लोगों को इसके बारे में बताया. फिर अगले साल एक और लेख लिखा. इसका नाम रखा ‘Concours des Voitures sans Chevaux’ यानी बिना घोड़े की गाड़ियों की प्रतियोगिता.

प्रतियोगिता की शर्तें इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार उस कार को दिया जाना था जिसने बिना किसी खतरे के आसानी से ड्राइव कर प्रतियोगिता को जीता हो. उन्होंने लेख में बताया कि यह दौड़ पेरिस के पोर्टे मैलोट से लेकर रूएन तक (कुल लगभग 126 किलोमीटर की तूरी) होगी.

मुकाबले की तारीख मुकाबले की तारीख थी 22 जुलाई 1894. प्रतियोगिता में कुल 21 कारों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम सुबह के 8 बजे शुरू हुआ. जब रेस खत्म हुई, उस समय लाखों लोगों की भीड़ जमा हो गई थी.

परिणाम जारी हुआ 24 जुलाई को  Le Petit Journal  के अंक में परिणाम जारी किया गया. जिसमें 5000 फ्रैंक का पहला पुरस्कार, पैनहार्ड एंड लेवासोर और प्यूजो के बीच बांटा गया. इन दोनों ने अपने मोटर वाहन में पेट्रोल मोटर का यूज किया था. 

वहीं दूसरा पुरस्कार 2000 फ्रैंक का था. जिसे मेसर्स डी डायोन, बाउटन एट सी को मिला. वों रेस में स्टीम ट्रैक्टर लाये थे, जो चढ़ाई वाली जगहों पर जबरदस्त ताकत से चढ़ी . 

यह  रेस ले आयी दुनिया में क्रांति फ्रांस की इस पहली मोटर रेस ने यूरोप में मोटर वाहनों पर रिसर्च और उन्हें और भी बेहतर बनाने की होड़ शुरू की. Le Petit Journal के इस अनोखे प्रयोग ने भविष्य की गति को बदल दिया.

उस मोटर रेस में शामिल होने वाली अधिकतर कंपनियां आज भी मौजूद हैं. पैनहार्ड एंड लेवासोर आज भी सैन्य वाहनों का उत्पादन करती है. वहीं पैनहार्ड एंड लेवासोर के साथ पहले स्थान पर रहे प्योजो कंपनी आज भी कारें, बाइक और स्कूटर बनाती है, बाउटन एट सी कंपनी आज F-1 रेसिंग कार बनाती है.