एक ऐसा अजीबोगरीब देश, जहां पुरुष पहनते हैं साड़ी, 500 साल पुरानी है परंपरा

मध्य प्रदेश के बुरहापुर जिले में ऐसी परंपरा का पालन होता है जो सुनने में तो काफी अटपटी लगती है. 

लेकिन यह परंपरा यहां के लोगों की पुरानी संस्कृति को दर्शाती है. सालों से उनके पूर्वज भी इस परंपरा का पालन करते आएं हैं.

बुरहानपुर जिले के रास्तीपुरा में माली समाज रहता है जो अपनी सालों पुरानी परंपराओं का आज भी पालन करने के लिए जाना जाता है. 

माली समाज में पुरुषों को साल में एक बार साड़ी पहनने की परंपरा 500 साल पुरानी हैं. परंपरा ये है कि सिर्फ साड़ी ही नहीं पहनना होता है बल्कि मुंझे महाराज की शोभा यात्रा में शामिल भी होना होता है. 

बसंत पंचमी के अवसर पर इस परंपरा का खास तरीके से पालन किया जाता है. 

माली समाज के लोग बताते हैं कि जिस तरह से मुंझे महाराज के कपड़े बनाए जाते थे, उसी तरह से आज भी माली समाज के पुरुषों को साल में एक दिन साड़ी पहनना जरूरी होता है और साथ में रुमाल भी बांधा जाता है.

पुरूष के साड़ी पहनने के बाद मुंझे महाराज की शोभायात्रा निकाली जाती है. शोभायात्रा में परिवार का हर सदस्य शामिल होता है और नाचते-गाते हुए ताप्ती नदी के घाट पर पहुंचता है. 

ताप्ती नदी पर पहुंचने के बाद स्नान करने की परंपरा है. स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना की जाती है फिर वहां मौजूद परिवार के लोगों को खाना खिलाया जाता है. 

माली समाज के बुजुर्ग नागरिक बताते हैं कि इस परंपरा को निभाने के लिए चांदी के मुंझे महाराज बनवाए जाते हैं. 

फिर अपने कुल देवता के स्थान से सोनार के यहां जाकर वहां से मुंझे महाराज को लेकर ताप्ती नदी जाते हैं और वहां महाराज को स्नान करवाते हैं और फिर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है.