मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम: देश के लिए क्या था उनका योगदान?
डॉ. अवुल पाकिर जैनुलुद्दीन अब्दुल कलाम को देश-विदेश में प्यार से 'एपीजे अब्दुल कलाम' और भारत के 'मिसाइल मैन' के रूप में जाना जाता है.
उन्हें यह उपाधि भारत की स्वदेशी गाइडेड मिसाइल तकनीक को विकसित करने और देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने में उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए मिली.
कलाम साहब ने भारत के दो प्रमुख संस्थानों- रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिलकर काम किया.
ISRO में रहते हुए वे भारत के पहले स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV-III) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहे. 18 जुलाई 1980 को इसी के जरिए रोहिणी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था.
साल 1983 में शुरू किए गए 'एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम' (IGMDP) के वे मुख्य कार्यकारी (Chief Executive) रहे और इसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया.
उनके नेतृत्व में 'अग्नि' और 'पृथ्वी' जैसी शक्तिशाली मिसाइलें विकसित हुईं, जिन्होंने भारत की सामरिक और रक्षा ताकत को पूरी दुनिया में लोहा मनवाया.
विज्ञान और रक्षा में देश का सिर ऊंचा करने के बाद, डॉ. कलाम ने 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में देश का नेतृत्व किया.
राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी वे देश के युवाओं, छात्रों और शिक्षा के विकास के लिए लगातार काम करते रहे और देश-दुनिया में व्याख्यान देते रहे.
27 जुलाई 2015 को शिलांग के IIM में व्याख्यान देने के दौरान ही देश के इस महान सपूत ने अंतिम सांस ली, लेकिन उनका योगदान अमर है.