कमर और लंबाई के अनुपात में छिपा है दिल का 'राज', ऐसे खतरे को पहचाने

दिल की बीमारी का खतरा अब सिर्फ मोटापे या हाई बीपी से नहीं पहचाना जाएगा. रिसर्च में खतरा पहचानने का एक नया तरीका सामने आया है.

BMI सिर्फ वजन और ऊंचाई के आधार पर गणना करता है, लेकिन यह नहीं बताता कि शरीर में फैट कहाँ जमा हुआ है, खासकर पेट के आसपास.

कमर का नाप और ऊंचाई का अनुपात दिल की बीमारी का खतरा पहचानने का सबसे भरोसेमंद तरीका हो सकता है.

पेट के चारों ओर जमा फैट दिल की बीमारी से सीधे जुड़ा होता है. WHtR इस सेंट्रल फैट को दर्शाता है, इसलिए यह बेहतर संकेतक है.

यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिनका BMI 30 से कम है, लेकिन वे फिर भी जोखिम में हो सकते हैं.

जिन लोगों का BMI सामान्य था, लेकिन उनका WHtR 0.5 से ज्यादा था, उन्हें भविष्य में दिल की धमनियों में कैल्शियम जमा होने का खतरा अधिक था.

WHtR सीधे पेट के फैट को दर्शाता है, जबकि BMI सिर्फ वजन का अनुपात है. पेट का फैट हृदय रोग का एक प्रमुख संकेतक है.

डॉक्टर WHtR का इस्तेमाल एक सरल और प्रभावशाली स्क्रीनिंग टूल के रूप में कर सकते हैं, खासकर जब पैरामीटर सामान्य दिखते हैं.

इस तरीके से समय रहते पहचान और इलाज संभव है, जिससे गंभीर रोगों और दिल के दौरे का खतरा कम किया जा सकता है.