ठंडों की 'ढाल' लौंग: सेहत पर कहीं बन न जाए तलवार, सावधानी जरूरी

सर्दियों में खांसी, जुकाम और पाचन संबंधी परेशानियों से बचने के लिए लौंग एक मजबूत ढाल है.

यह कफ और पित्त दोष को शांत करती है. लौंग खांसी, श्वास रोग और हिचकी दूर करने में बेहद कारगर है.

लौंग जठराग्नि को बढ़ाती है, जिससे पाचन सुधरता है और भूख न लगने की समस्या दूर होती है.

इसके सेवन से रक्त में श्वेत कणों (WBC) की संख्या बढ़ती है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है.

दांत दर्द में रुई में भिगोकर लौंग का तेल दांत के गड्ढे में रखने से तुरंत राहत मिलती है और कीड़े मर जाते हैं.

कमर दर्द या वात विकारों में लौंग के तेल की मालिश फायदेमंद है. सिरदर्द में ललाट पर इसका लेप लगाने से आराम मिलता है.

मुंह और गले के रोगों में लौंग चूसने से राहत मिलती है. यह मुंह की दुर्गंध दूर करने में भी सहायक है.

लौंग की तासीर गर्म होती है. अगर शरीर में ज्यादा गर्मी, सूजन या पित्त बढ़ने के लक्षण हों, तो इसका सेवन न करें.

हमेशा सीमित मात्रा में और किसी गंभीर समस्या में विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही इसका सेवन करें.