वो कौन सा देश जहां नमाज न पढ़ने पर होती है जेल की सजा?

मलेशिया के तेरेंगानु राज्य ने नया नियम लागू किया है. अगर कोई मुसलमान बिना वजह जुमे की नमाज नहीं पढ़ता, तो उसे दो साल जेल और 3000 रिंगित जुर्माना हो सकता है.

पहले यहां सजा इतनी कड़ी नहीं थी. लगातार तीन जुमे मिस करने पर सिर्फ 6 महीने जेल या 1000 रिंगित जुर्माना लगता था.

अब मस्जिदों में बोर्ड लगाकर लोगों को नियम याद दिलाए जाएंगे. साथ ही धार्मिक गश्ती दल भी जांच करेगा कि कौन नमाज पढ़ने आया या नहीं.

मलेशिया में हर राज्य धार्मिक मामलों पर खुद कानून बना सकता है. यह कानून पहली बार 2001 में लागू हुआ था और 2016 में इसमें बदलाव किए गए.

मलेशिया में डुअल लीगल सिस्टम है, एक तरफ सिविल लॉ और दूसरी तरफ शरिया कोर्ट, जो मुसलमानों के पारिवारिक और निजी मामलों को देखती है.

जिस राजनीतिक पार्टी ने तेरेंगानु में ये नियम लागू किया है, वह मलेशिया की संसद में सबसे बड़ी पार्टी भी है और लंबे समय से कड़े धार्मिक कानूनों की वकालत करती आई है.

दुनिया के कई मुस्लिम देशों में नमाज फर्ज़ माना जाता है, लेकिन कानूनी सज़ा देने का नियम बहुत कम देशों में देखने को मिलता है.

सऊदी अरब में पहले मस्जिद की अज़ान होते ही बाज़ार बंद करवाए जाते थे. 2016 के बाद सख्ती थोड़ी कम हुई, लेकिन सार्वजनिक जगह पर नमाज न पढ़ने पर अब भी कार्रवाई हो सकती है.

ईरान में सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और आर्मी में नमाज न पढ़ने पर नौकरी तक जा सकती है. कई मामलों में जुर्माना और हिरासत भी होती है.

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के दौर में नमाज के वक्त दुकानदारों और आम लोगों पर मस्जिद जाने का दबाव रहता है. नियम तोड़ने पर सज़ा, फटकार या जुर्माना हो सकता है.

क़तर, मॉरिटानिया और सोमालिया में नमाज को लेकर कानून तो हैं, लेकिन रोजाना उन पर इतनी सख्ती नहीं होती. हालांकि सामाजिक दबाव काफी ज्यादा है.

कुछ मुस्लिम देश जैसे कजाखस्तान, अल्बानिया, तुर्की और बोस्निया में लोग काफी हद तक धर्मनिरपेक्ष हैं, इसलिए यहां नमाज को लेकर सख्ती नहीं है.