दुनिया के वो देश जहां सड़कों से गायब हो चुके हैं आवारा कुत्ते

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि 8 हफ्तों के भीतर सभी आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर डॉग शेल्टर में रखा जाए, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

इस फैसले को लेकर राय बंटी हुई है, कुछ लोग इसे जरूरी कदम मानते हैं, जबकि PETA इंडिया का कहना है कि ये न तो स्थायी और न ही वैज्ञानिक समाधान है.

भूटान ने 2023 में 100% आवारा कुत्तों की नसबंदी कर दी. 14 साल चले प्रोग्राम में 1.5 लाख से ज्यादा कुत्तों को कवर किया गया और रेबीज के मामले लगभग खत्म हो गए.

मोरक्को ने अपनाया TNVR तरीका, पकड़ना, नसबंदी करना, वैक्सीन लगाना और फिर उसी इलाके में छोड़ना. इस पर सरकार ने पिछले 5 साल में करीब 190 करोड़ रुपये खर्च किए.

नीदरलैंड आज यूरोप का पहला देश है जहां एक भी आवारा कुत्ता नहीं है. CNVR प्रोग्राम, कड़े कानून और पेट पुलिस ने यह बदलाव संभव बनाया.

जापान में सख्त एनिमल वेलफेयर नियम हैं. यहां कुत्तों को पकड़ा जाता है, क्वारंटीन में रखा जाता है और गोद लेने को बढ़ावा दिया जाता है, ताकि उनकी संख्या सड़कों पर न बढ़े.

बीमार या खतरनाक कुत्तों को जापान में दया-मृत्यु दी जाती है. हालांकि, इस तरीके को लेकर आलोचना भी होती है.

साउथ कोरिया में बढ़ते छोड़े गए पालतू जानवरों से निपटने के लिए TNR प्रोग्राम चल रहा है, खासकर बिल्लियों के लिए, जिससे उनकी संख्या काबू में रहे.

इन देशों से भारत भी सीख सकता है कि मानवीय तरीकों, नसबंदी और वैक्सीनेशन के जरिए आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी हल निकाला जा सकता है. न की सिर्फ उन्हें पकड़कर घरों से दूर शेल्टर मे डालना ही एक मातृ समाधान है.