सबसे घातक फइटर जेट होने के बाद भी , उसे नहीं उड़ाते ये देश जानिये क्यों ?

देशों  के लिए फाइटर जेट उनकी ताकत का अहम हिस्सा है, दुनिया में कई ऐसे देश हैं जिनके पास अत्याधुनिक फाइटर जेट्स तो हैं, प्रशिक्षित पायलट नहीं .

आइए जानते हैं ,कौन है ऐसे देश , जहां फाइटर जेट्स सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं.

* सोमालिया - केवल नाम की वायुसेना इसके पास कभी सोवियत-युग के मिग फाइटर जेट्स थे, लेकिन लगातार अस्थिरता, ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और तकनीकी तंगी कारण जो  विमान बचे थे, वे अब बेकार खड़े हैं. यहां विमानों की कमी है, बल्कि पायलट की हैं.

*लीबिया- सेना के बिना जेट्स लीबिया के पास  मिग-21, मिग-23 और मिराज F1 जैसे विमान थे. लेकिन सालों के गृहयुद्ध ने  इसके बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया . एयरबेस पर बमबारी हुई, अब बचे जेट्स या तो बेकार पड़े हैं या उनके पुर्जे दूसरे विमानों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

*चाड- खरीदे गए जेट्स, लेकिन उड़ते नहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक, चाड ने 2014 में यूक्रेन से मिग-29 फाइटर जेट्स खरीदे थे. हालांकि, बजट की कमी और प्रशिक्षित पायलटों की गैर-मौजूदगी के कारण देश उन्हें संचालित करने में संघर्ष कर रहा है. कुछ मामलों में, भाड़े के पायलटों को लाये जाता है.

*यमन- युद्धग्रस्त और बेकार पड़े विमान यमन के Su-22s और मिग-29s कभी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण थे. लेकिन सालों के गृहयुद्ध और सऊदी अरब नेतृत्व वाले बमबारी अभियानों ने देश के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म कर दिया . 

पायलटों की कमी का क्या कारण हो सकता है?

एक फाइटर पायलट को प्रशिक्षित करने में 2 से 3 साल और लाखों डॉलर लगते हैं. इसमें सिमुलेटर, रखरखाव , जमीनी कर्मचारी और ईंधन का खर्च  जोड़े तो एक ऐसा इकोसिस्टम बन जाता है,जिसे कई युद्धग्रस्त या आर्थिक रूप से कमजोर देश बनाए नहीं रख सकते. 

कई देशों के लिए, जेट खरीदना युद्ध से ज्यादा 'दिखावे' की बात है. वहीं कुछ को भविष्य के निवेश, व्यापारिक लाभ या यहां तक कि स्पेयर पार्ट्स के रूप में खरीदा जाता है. ऐसे में, पायलटों के बिना फाइटर जेट, ड्राइवर के बिना लक्जरी स्पोर्ट्स कार की तरह हैं.