धार भोजशाला फैसला: 10 सबूत जिन्होंने तय की हिंदू पक्ष की जीत!

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को धार की विवादित भोजशाला को स्पष्ट रूप से 'वाग्देवी मंदिर' घोषित कर हिंदुओं की भूमि माना है.

अदालत ने अपने निर्णय में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों को सबसे बड़ा आधार बनाया.

वैज्ञानिक सर्वे के दौरान परिसर से भगवान कुबेर समेत विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं की 32 प्राचीन मूर्तियां और अवशेष प्राप्त हुए हैं.

भोजशाला के स्तंभों पर हिंदू कलाकृतियां, शंख-चक्र के चिह्न और पत्थरों पर 'ॐ नमः शिवाय' जैसे संस्कृत के श्लोक व मंत्र मिले हैं.

हाईकोर्ट ने अयोध्या मामले का हवाला देते हुए कहा कि पुरातात्विक साक्ष्य सिद्ध करते हैं कि यह मूल रूप से एक हिंदू संरचना है.

कोर्ट ने साल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत मुस्लिमों को शुक्रवार को यहां नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी.

भोजशाला का इतिहास 990 साल पुराना है. इसका निर्माण राजा भोज ने 1034 ईस्वी में सरस्वती (वाग्देवी) मंदिर और शिक्षा केंद्र के रूप में कराया था.

साल 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी और बाद के मुस्लिम शासकों ने इस मंदिर को तोड़कर इस्लामी ढांचा बनाने के प्रयास किए थे.

भोजशाला की मूल वाग्देवी प्रतिमा अंग्रेजी शासनकाल में लंदन ले जाई गई थी, जो वर्तमान में ब्रिटिश म्यूजियम में रखी है.

यह प्रॉपर्टी ASI के संरक्षण में ही रहेगी, लेकिन हिंदुओं को यहां अब पूजा का पूर्ण अधिकार होगा, मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन मांगने की सलाह दी गई है.