गणेश चतुर्थी पर स्थापना करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना बुरा हो सकता है अंजाम

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. उन्हें गजानन, बप्पा, गणपति और विघ्नहर्ता नामों से पूजा जाता है.

इस साल गणेश चतुर्थी का उत्सव 27 अगस्त से शुरू होकर 7 सितंबर तक चलेगा. देशभर में यह पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा.

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में बैठे हुए गणेश जी की प्रतिमा रखना सबसे शुभ माना जाता है. इससे घर में शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है.

मूर्ति को स्थापित करते समय सीधा फर्श या कहीं भी नहीं रखना चाहिए. यह शुभ नहीं माना जाता. मूर्ति को हमेशा लकड़ी की चौकी, लाल या पीले वस्त्र पर स्थापित करना चाहिए. इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

गणेश जी की मूर्ति लेते समय उनकी सूंड का बाईं ओर मुड़ा होना चाहिए. ऐसा करना शुभ माना जाता है. यह आनंद और खुशहाली का प्रतीक है.

घर या पंडाल में एक ही गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करना चाहिए. वरना एक ही पंडाल में ज्यादा मूर्तियों को स्थापित करने से पूजा का फल आधा होता है.

वास्तु के अनुसार, गणेश प्रतिमा में उनके प्रिय मोदक और वाहन मूषक का होना जरूरी है. ऐसी प्रतिमा घर लाना बेहद शुभ फल देने वाली होती है.

सफेद रंग की गणपति प्रतिमा घर में शांति और सौहार्द लाती है. वहीं सिंदूरी रंग की प्रतिमा उन्नति और सफलता का प्रतीक होती है.

गणेश प्रतिमा को घर में चतुर्थी से पहले शुभ मुहूर्त में लाना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है.