आपको मालूम है कावड़ यात्रा कितने प्रकार की होती है? यहां जानें इसके नियम 

कावड़ यात्रा हिंदू धर्म की एक पवित्र और आस्था से जुड़ी वार्षिक यात्रा है जो भगवान शिव के भक्तों द्वारा विशेष रूप से सावन के महीने में की जाती है. 

आपको मालूम है कावड़ यात्रा कितने प्रकार की होती है? यहां जानें इसके नियम 

इस यात्रा में भक्त जिन्हें 'कांवड़िया' कहा जाता है गंगा नदी या अन्य पवित्र जल स्त्रोतों से जल भरकर कांवड़ कावड़ के माध्यम से शिव मंदिरों तक पैदल यात्रा करते हैं. उस जल को शिवलिंग पर चढ़ाते हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कावड़ यात्रा कितने प्रकार के होते हैं? चलिए हम आपको बताते हैं इसके बारे में.

सबसे पहला है साधारण कांवड़ यह कांवड़ का सबसे आम प्रकार है. इसमें भक्त पवित्र नदी से जल भरकर धीरे-धीरे अपने गंतव्य तक पैदल जाते हैं. इस यात्रा में बीच-बीच में विश्राम भी करते हैं. 

दूसरा डाक कांवड़ है यह एक कठिन यात्रा है. इसमें जल लेने के बाद बिना रुके और बिना आराम किए दौड़ते हुए यात्रा पूरी की जाती है. 

इसके अलावा खड़ी कांवड़ इस कांवड़ यात्रा का एक मुख्य नियम यह है कि कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता. शिवलिंग पर जल चढ़ाने तक भक्तों को बारी-बारी से कांवड़ को कंधों पर उठाना होता है. 

फिर आता है दंडी कांवड़ यात्रा जो सबसे कठिन मानी जाती है. इसमें भक्त दंड बैठक करके यात्रा करते हैं. यह यात्रा समय लेने वाली होती है. क्योंकि इसमें दंड बैठक की स्थिति में लगातार लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. 

आपने कांवड़ यात्रा के प्रकार तो जान लिए चलिए अब आपको इसके नियम के बारे में बताते हैं. 

कांवड़ यात्रा के दौरान भक्तों को सात्विक भोजन करना चाहिए. मांसाहारी भोजन, शराब और किसी भी तरह का नशा नहीं करना चाहिए. 

कांवड़ यात्रा एक शांतिपूर्ण अनुभव है. प्रतिभागियों से अपेक्षा की जाती है कि वे दूसरों का सम्मान करें, सेवा की भावना रखें और किसी भी प्रकार का व्यवाधान न पैदा करें.