जन्म का पहला घंटा: शिशु के लिए मां का दूध क्यों है अनमोल?

बच्चे के जन्म के बाद का पहला घंटा 'गोल्डन ऑवर' कहलाता है. इस दौरान स्तनपान शुरू करना शिशु के जीवन की नींव है.

जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध 'कोलोस्ट्रम' कहलाता है. यह बच्चे के लिए पहली वैक्सीन की तरह काम करता है.

मां के दूध में भरपूर एंटीबॉडीज होते हैं. ये शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और उसे संक्रमण से बचाते हैं.

जन्म के बाद बच्चे को शहद, घुट्टी या पानी देना खतरनाक हो सकता है. इससे संक्रमण और दस्त होने का बड़ा खतरा रहता है.

शुरुआती छह महीनों सिर्फ स्तनपान ही कराएं. मां के दूध में 80% से ज्यादा पानी होता है, जो भूख और प्यास दोनों मिटाता है.

लोग गर्मी में बच्चे को पानी देते हैं. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. मां का दूध बच्चे को पूरी तरह हाइड्रेटेड रखता है.

बच्चे को स्तनपान कराने का कोई तय समय न बनाएं. जब भी बच्चा भूख का संकेत दे, उसे दूध पिलाएं.

मां के दूध में मौजूद पोषक तत्व बच्चे के शारीरिक विकास के साथ-साथ उसके मानसिक और दिमागी विकास के लिए भी अनिवार्य हैं.

स्तनपान कराने से मां का शरीर प्रसव के बाद जल्दी रिकवर करता है और गर्भाशय अपनी सामान्य स्थिति में जल्दी लौट आता है.

स्तनपान प्राकृतिक रूप से अगली गर्भावस्था को कुछ समय तक टालने में भी मां की मदद करता है. यह भावनात्मक बंधन बनाता है.

एक घंटे के भीतर स्तनपान बच्चे को एक स्वस्थ और मजबूत भविष्य देती है. किसी भी समस्या के होने पर डॉक्टर से सलाह लें.