कंप्यूटर पर काम बना सकता है फ्रोजन शोल्डर का शिकार, 5 लक्षण और इलाज

आज की जीवनशैली में गर्दन और कंधे से जुड़ी समस्याएं बढ़ गई हैं. करवट लेने या हाथ हिलाने में भी दिक्कत हो तो यह फ्रोजन शोल्डर हो सकता है.

आयुर्वेद में फ्रोजन शोल्डर को 'अवबाहुक शूल' कहा गया है. इसे वात दोष और कफ दोष के असंतुलन से जोड़ा जाता है.

इसके लक्षणों में जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में जकड़न, कंधे से लेकर गर्दन में खिंचाव और गंभीर स्थिति में गर्दन का न मोड़ पाना शामिल है.

ज्यादा तला-भूना खाना, कम पानी पीना, ज्यादा समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और ज्यादा भार उठाना इसके मुख्य कारण हैं.

तिल का तेल, दशमूल तेल या बालाश्वगंधा तेल से खिंचाव वाले हिस्से पर मालिश करें. यह रक्त संचार बढ़ाएगा और दर्द कम करेगा.

रोज़ाना सुबह 10 मिनट और शाम को 10 मिनट मालिश करें. इससे मांसपेशियों की जकड़न में जल्द राहत मिलती है.

मालिश के बाद गर्म पट्टी का इस्तेमाल करें या भाप लगाकर तवे की सहायता से सेक (स्वेदन) कर सकते हैं. इससे जकड़न में तुरंत आराम मिलेगा.

हल्दी वाला दूध एंटी-इंफ्लेमेटरी होता है. यह मांसपेशियों की जकड़न कम करेगा और दर्द से राहत दिलाएगा. इसे रोज़ रात को पिएं.

गिलोय का रस सुबह खाली पेट पीने से हड्डियां मजबूत होती हैं. अश्वगंधा और योगराज गुग्गुल का चूर्ण रात में लेने से दर्द और सूजन में आराम मिलता है.

अपनी लाइफस्टाइल बदलें और ज्यादा देर तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें. इसके साथ ही गर्म पानी से नहाने से भी मांसपेशियों को आराम मिलेगा.