दुनिया में गेहूं संकट के बीच भारत की बड़ी छलांग

साल 2026 FAO के अनुसार, दुनिया भर में गेहूं उत्पादन में 3% की गिरावट का अनुमान है.

कीमतों में कमी के कारण रूस, अमेरिका और यूरोप के किसानों ने इस साल गेहूं की बुवाई कम कर दी है.

भारत से सकारात्मक खबर है. यहां इस साल गेहूं उत्पादन के नए रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है.

14% हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश बनकर उभर रहा है.

इस साल उत्पादन 120 मिलियन टन के पार जा सकता है, जो वैश्विक मंदी के बीच एक बड़ी उपलब्धि होगी.

चीन और यूरोपीय संघ की सबसे बड़े उत्पादक बने रहेंगे. हालांकि, कमी आना तय है.

रूस के किसान तिलहन बो रहे हैं और अमेरिका में कीमतों में गिरावट ने बुवाई क्षेत्र को कम कर दिया है.

MSP में वृद्धि और सरकारी प्रोत्साहन ने भारतीय किसानों को गेहूं की रिकॉर्ड बुवाई के लिए प्रेरित किया है.

इस बार गेहूं की बुवाई का क्षेत्र 6.13 लाख हेक्टेयर बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है.

उत्तर भारत में फसल पर थोड़ा दबाव है, फिर भी कुल उत्पादन पिछले रिकॉर्ड के आसपास रहने की संभावना है.

कनाडा में रिकॉर्ड उत्पादन के मुकाबले कमी की आशंका है, वहीं युद्धग्रस्त यूक्रेन में यह काफी नीचे है.

यदि भारत का उत्पादन लक्ष्य पूरा होता है तो दुनिया की भूख मिटाने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा.