शिव-पार्वती की कृपा पाने का सुनहरा मौका! भौम प्रदोष और जया पार्वती व्रत एक साथ, जानिए शुभ मुहूर्त और व्रत विधि.
भौम प्रदोष व्रत क्यों है खास?
मंगलवार को आने वाला प्रदोष ‘भौम प्रदोष’ कहलाता है, जो शिव और मंगल ग्रह दोनों की कृपा दिलाता है.
शुभ मुहूर्त क्या है?
7 जुलाई को प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त शाम 7:23 से रात 9:24 तक रहेगा.
क्या मिलते हैं लाभ?
इस व्रत से कर्ज, कोर्ट-कचहरी, शत्रु और रक्त संबंधी रोगों से मिलती है मुक्ति.
शिव पुराण की मान्यता
कहा गया है कि इस व्रत से हर अधूरी मनोकामना पूरी होती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं.
7 जुलाई से जया पार्वती व्रत शुरू हो रहा है. इस व्रत को खासतौर पर कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी के लिए करती हैं.
मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए यह व्रत किया था, तभी इस व्रत को बेहद शुभ माना जाता है.
व्रत में विशेष पूजा होती है. रेत या बालू का हाथी बनाकर उस पर फल-फूल और प्रसाद चढ़ाया जाता है. इससे मां पार्वती प्रसन्न होती हैं.
सुबह स्नान के बाद, शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित कर, बेलपत्र, कुमकुम, फल-फूल और नारियल अर्पित करें.
पूजा के बाद रात्रि जागरण करें और अगली सुबह बालू का हाथी नदी या तालाब में विसर्जित करें.