किसानों के लिए खुशखबरी: गन्ने पर मिलेगी भारी सब्सिडी

कभी हरियाणा की शान मानी जाने वाली गन्ने की फसल आज घटते रकबे और कम उत्पादन की बड़ी चुनौती का सामना कर रही है.

साल 2022-23 में गन्ने की खेती 2.66 लाख एकड़ में थी, जो अब लगातार कम होती जा रही है. यह चिंता का बड़ा विषय है.

आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में जहाँ 858 लाख क्विंटल गन्ना हुआ था, वहीं 2025-26 में इसके गिरकर 536 लाख क्विंटल रहने का अनुमान है.

गन्ने की कमी के कारण इस साल चीनी मिलों का संचालन प्रभावित हो सकता है. अनुमान है कि मिलें केवल 108 दिन ही चल पाएंगी.

गन्ने की बुवाई से कटाई तक बहुत श्रम चाहिए. मजदूरों की कमी और बढ़ती दिहाड़ी के कारण किसान दूसरी फसलों की ओर मुड़ रहे हैं.

बदलते मानसून चक्र ने गन्ने के अंकुरण को प्रभावित किया है. अप्रैल की असमय बारिश पौधों की बढ़वार में बाधा डाल रही है.

सहकारिता मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी है ताकि लागत कम हो और मुनाफा बढ़े.

चौड़ी कतारों में गन्ना लगाने पर अभी ₹3,000 प्रति एकड़ सब्सिडी मिलती है, जिसे बजट 2026-27 में ₹5,000 करने का प्रस्ताव है.

स्वस्थ और रोगमुक्त बीज तैयार करने के लिए सरकार किसानों को ₹5,000 प्रति एकड़ की सहायता राशि प्रदान कर रही है.

टिशू कल्चर तकनीक अपनाने वाले किसानों के लिए सरकार ने मुफ्त बीज देने का प्रस्ताव रखा है, जिससे पैदावार में सुधार होगा.

अब किसानों को मिलों के बाहर घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा. ऑनलाइन टोकन सिस्टम से हर ट्रॉली पर 10-12 घंटे की बचत हो रही है.

बेहतर सब्सिडी, आधुनिक मशीनों और ऑनलाइन सुविधाओं के जरिए सरकार गन्ने की खेती को फिर से मुनाफे का सौदा बनाने में जुटी है.