आपका AC, फ्रिज, हीटर, गीजर, माइक्रोवेव, ओवन और गाड़ी... सब मिलकर मौसम पर कहर ढा रहे हैं. धरती का तापमान बढ़ाने में आपका भी बड़ा योगदान है.

साल 2022 में जारी ‘क्लाइमेट एटलस ऑफ इंडिया’ रिपोर्ट कहती है कि भारत के 28 राज्यों के 723 ज़िले आगाह कर रहें हैं कि आगे खतरा बढ़ रहा है. 

सीएसटीईपी रिपोर्ट्स के अनुसार  साल 2021 से 2050 के बीच भारत के अधिकांश जिलों का तापमान पिछले 30 सालों के मुकाबले 1 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है.

जिन राज्यों में सबसे ज्यादा गर्मी की मार पड़ी है उनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात और उत्तर पूर्वी राज्य शामिल हैं.

जिन राज्यों में सबसे ज्यादा गर्मी की मार पड़ी है उनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात और उत्तर पूर्वी राज्य शामिल हैं.

विज्ञान की भाषा में कहें तो अभी हीटवेव को ड्राइ बल्ब टेंपरेचर के आधार पर तय किया जाता है कि हीटवेव है या नहीं.

अगर तापमान 45 डिग्री से आगे बढ़ जाए तो हम कहते हैं कि हीटवेव है. यानि सामान्य तापमान से चार पांच डिग्री ज्यादा हो तब, जबकि हमारे शरीर पर तापमान और ह्यूमिडिटी दोनों का असर होता है.

हीटस्ट्रोक, हीट और ह्ययूमिडिटी के कॉबिनेशन से होता है, इसे वेट बल्ब टेंपरेचर से आंका जाता है. वेट बल्ब टेंपरेचर अगर 30-32 डिग्री से भी ज्यादा है तो बहुत घातक माना जाता है,

तापमान अगर 40 डिग्री है और ह्ययूमिडिटी नहीं है तो लोग सह लेंगे, जबकि अगर तापमान 35 डिग्री है और ह्यूमिडिटी 80 फीसदी है तो लोग सह नहीं पाएंगे.

तापमान अगर 40 डिग्री है और ह्ययूमिडिटी नहीं है तो लोग सह लेंगे, जबकि अगर तापमान 35 डिग्री है और ह्यूमिडिटी 80 फीसदी है तो लोग सह नहीं पाएंगे.