चुनाव में इस्तेमाल होने वाली इंक कैसे बनती है?

जब मतदान होता है, तो वोटर की अंगुली पर नीला/बैंगनी निशान दिखाई देता है. ये सिर्फ एक मार्किंग नहीं होती, बल्कि लोकतंत्र को सुरक्षीत रखने का एक तरीका है.

इस इंक को “असार एंक” (indelible ink) कहा जाता है जिसका मतलब है जिसे आसानी से साफ नहीं किया जा सकता.

भारत में इस इंक का फॉर्मूला National Physical Laboratory (NPL) ने तैयार किया था और Mysore Paints and Varnish Limited (MPVL) इस इंक को बनाती है.

इस इंक में मुख्य रूप से सिल्वर नाइट्रेट (silver nitrate) होता है. जब ये त्वचा या नाखून पर लगता है और सूरज की रोशनी या किसी और कारणों से रिएक्ट करता है, तब वो रंग-छाप छोड़ता है.

इस इंक में एक सॉल्वेंट (जैसे अल्कोहॉल) और कुछ विशेष रंग और रसायन होते हैं, जिससे इंक जल्दी सूखे और हाथ से आसानी से न हटे. 

हालांकि इसे तैयार करने में काफी प्राइवेसी बर्ती जाती है, क्योंकि अगर पूरी प्रक्रिया सामने आ जाए तो धोखाधड़ी की संभावना बढ़ सकती है. इसलिए ढेरों सुरक्षा-मापदंड हैं.

मतदान के बाद इस निशान की वजह ये है कि एक ही व्यक्ति दो बार वोट न दे सके. ये लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुरक्षित बनाता है. 

हालांकि ये इंक “असार” कहलाती है, इसका मतलब ये नहीं कि इसे पूरी तरह हटाया नहीं जा सकता पर आम तरीके से हटाना बहुत मुश्किल है.

तो अगली बार जब आपके अंगुली पर वो रंग दिखे, तो समझ जाइए: ये सिर्फ एक निशानी नहीं, बल्कि आपके मत के महत्त्व और लोकतंत्र की रक्षा की एक चाल है.