मरने से पहले 4 बार जन्म लेता है एक इंसान का दिमाग

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की नई स्टडी ने ये खुलासा किया है कि हमारा दिमाग उम्र के पड़ावों को पार करते करते चार बार अपना पूरा ढांचा बदलता है.

पहली बार ये 9 वर्ष की आयु में होता है. तब दिमाग न्यूरॉन्स के एक्स्ट्रा कनेक्टर (Synapses) को काट छांट कर कम कर देता है.

इस उम्र में बच्चे मानसिक स्वास्थ्य दिक्कतों के लिए ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं, इसलिए इमोशनल सपोर्ट बहुत जरूरी होता है.

वहीं, 32 की उम्र को दिमाग का “पीक परफॉर्मेंस” कहा गया है, क्योंकि इस उम्र में सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता अपने चरम पर होती है.

स्टडी के अनुसार दिमाग असली ‘एडल्ट मोड’ में 30 की शुरुआत के बाद आता है, न कि 18 की उम्र में. साथ ही यह उम्र पूरे जीवनकाल का ‘स्ट्रॉन्गेस्ट टोपोलॉजिकल टर्निंग पॉइंट’ है.

तीसरी बार ऐसा 66 की उम्र में होता है, जब दिमाग में व्हाइट मैटर कम होने लगता है और दिमाग की कनेक्टिविटी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है.

इस उम्र में हाइपरटेंशन और उम्र से जुड़ी बीमारियां दिमाग पर सीधा असर डालती हैं, इसलिए सेहत पर खास ध्यान जरूरी है.

83 की उम्र में दिमाग ग्लोबल नेटवर्क से हटकर लोकल कनेक्शन पर निर्भर होने लगता है. याददाश्त और सोच दोनों तेजी से कमजोर होती हैं.

यह सिर्फ एक स्टडी नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक चेतावनी है. इससे डॉक्टर ये समझ पाएंगे कि किस उम्र में दिमाग सबसे कमजोर होता है और कौन-सी बीमारियां कब उभरती हैं.