मां के इस मंदिर में चढ़ाते हैं ईंट, मिलता है आलीशान बंगला, पढ़ें मान्यता!
कानपुर के किदवई नगर में स्थित मां जंगली देवी का मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है.
मान्यता है कि जो भक्त यहां एक ईंट चढ़ाकर अपने मकान में लगाते हैं, उनका घर जल्द ही एक भव्य बंगले में बदल जाता है. इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु नवरात्र के दौरान अपनी मुरादें लेकर आते हैं.
मां जंगली देवी का मंदिर एक प्राचीन आस्था का केंद्र है. कहा जाता है कि यह मंदिर किदवई नगर के जंगलों में स्थापित हुआ था, जिसके कारण इसका नाम 'जंगली देवी' पड़ा.
मां के कई रूपों की तरह, यह मंदिर भी एक अद्भुत धार्मिक स्थल माना जाता है, जहां देवी अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण करती हैं.
भक्तों के अनुसार, नवरात्रि के पावन दिनों में मां की मूर्ति का रंग दिन में तीन बार बदलता है.
जब कोई भक्त मां के चेहरे को निहार कर अपनी मनोकामना प्रकट करता है और मां की मूर्ति गुलाबी रंग की हो जाती है, तो यह संकेत माना जाता है कि उसकी मुराद जल्द पूरी होगी.
मंदिर में वर्ष 1980 से एक अखंड ज्योति जल रही है. भक्तों का विश्वास है कि इस ज्योति को जलाने में योगदान देने वाले भक्तों की सभी इच्छाएं मां स्वयं पूरी करती हैं.
इसके अलावा, नवरात्र के छठवें दिन मंदिर प्रशासन द्वारा भक्तों को तांबे के सिक्के वितरित किए जाते हैं, जिन्हें घर की तिजोरी में रखने से आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है.
मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है. इसे 838 ईस्वी में भगाई गांव के राजा भोज ने बनवाया था.
समय के साथ मंदिर का क्षय होता गया, लेकिन 17 मार्च 1925 को इसका पुनः जीर्णोद्धार कराया गया. इस दौरान मंदिर में मिले ताम्रपत्र और मूर्तियों को पुनः प्रतिष्ठित किया गया.