संकट के बीच विदेशों में महकी भारतीय इलायची, आसमान पर निर्यात के आंकड़े
पश्चिम एशिया के हालातों के बावजूद भारतीय इलायची की विदेशी मांग में कोई कमी नहीं आई है.
'ग्वाटेमाला' में इस बार फसल को भारी नुकसान हुआ है. वहां उत्पादन करीब 50% तक घट गया है.
ग्वाटेमाला में सप्लाई घटने से वैश्विक बाजार में भारत की प्रीमियम और उच्च गुणवत्ता वाली इलायची की मांग बढ़ी है.
हार्मुज के रास्ते शिपिंग में बड़ी दिक्कतें हैं. इसके बावजूद खरीदार ज्यादा किराया देकर भारतीय माल मंगवा रहे हैं.
मांग में भारी उछाल के कारण इसके दाम देश में नीलामी के दौरान भाव ₹2200 से ₹2350 प्रति किलो के बीच बने हुए हैं.
इलायची के गढ़ कहे जाने वाले केरल के इडुक्की में पहले निराशा रही लेकिन प्री-मानसून बारिश से संजीवनी मिल गई.
आंकड़ों के अनुसार, साल 2025-26 में इलायची का कुल उत्पादन करीब 35,000 से 37,000 टन रहने का अनुमान है.
अगले सीजन में भारतीय इलायची का उत्पादन 40,000 टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है.
फायदे के बीच एक चिंता भी है कि उर्वरकों दाम बढ़ने से किसानों के मुनाफे में कमी आ सकती है.