क्या आप जानते हैं, भारतीय हर साल कितने समोसे और जलेबी खा जाते हैं?
भारत में हर साल खाए जाते हैं करीब 21,000 करोड़ समोसे, यानि हर सेकंड हजारों समोसे बिक जाते हैं, यह संख्या कई देशों की आबादी से भी ज्यादा है.
हर भारतीय औसतन साल में दर्जनों समोसे खा जाता है, समोसा केवल स्नैक नहीं, बल्कि हमारी भूख मिटाने वाला साथी है, मौसम कोई भी हो, समोसे का स्वाद हमेशा दिल जीत लेता है.
इतने समोसे की कीमत अरबों रुपये में होती है, कहते हैं, कोई भी गम भुला दे… बस एक गरम समोसा मिल जाए, चाय के साथ तो इसका मज़ा और दोगुना हो जाता है.
जलेबी भी भारतीयों की कमजोरी है,गर्म-गर्म जलेबी देखकर किसका मन नहीं ललचाएगा जलेबी का स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको दीवाना बना देता है.
रिपोर्ट कहती है, भारत में हर साल करीब 34 करोड़ किलो जलेबी खाई जाती है.
इतनी जलेबी से कई किलोमीटर लंबी मिठास की रस्सी बनाई जा सकती है, सोचिए, अगर सारी जलेबी एक ही लाइन में रख दी जाए तो वह कितनी दूर तक जाएगी.
34 करोड़ किलो मतलब करोड़ों-करोड़ों जलेबियाँ हर साल प्लेटों में सजती हैं,मीठी खुशबू, कुरकुरी बनावट और रस की मिठास… जलेबी हर भारतीय के दिल पर राज करती है.
समोसा और जलेबी भारत के स्ट्रीट फूड कल्चर का दिल हैं, स्ट्रीट वेंडर की दुकान हो या बड़ी मिठाई की दुकान, इनकी खुशबू दूर तक फैल जाती है, इनके बिना भारतीय फूड कल्चर अधूरा है.
शादी, त्योहार, पार्टी…समोसा-जलेबी हर जगह छाए रहते हैं, लोग कहते हैं – “कोई भी जश्न समोसे-जलेबी के बिना पूरा नहीं, शादी के मेन्यू में तो यह स्टार डिश होती है.
हर राज्य का समोसा और जलेबी बनाने का तरीका अलग है, कहीं मसाले तेज होते हैं, तो कहीं मीठा ज्यादा घुला होता है, यही विविधता भारत को खास बनाती है.