घर में चूहों को मारना अपराध है या नहीं? यहां जानें क्या कहता है कानून
आपने हर घर में चूहों को देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी सोचा है अगर भारत में घर में चूहों को मारना अपराध है या नहीं? क्या चूहे को मारने पर जेल जाना पड़ सकता है? चलिए जानते हैं.
अगर आपके घर में चूहे हैं तो वो आपका काफी नुकसान कर सकते हैं. इसलिए लोगों को डर रहता है कि वे कपड़ों और कागजों को नुकसान नहीं पहुंचा दे.
ऐसे में कई लोग चूहों से निजात पाने के लिए कई तरह की तरकीब अपनाते हैं. इसमें रैट किल जैसे चूहे मारने वाली दवा से लेकर ट्रैप तक का इस्तेमाल किया जाता है.
अब कानून की बात करें तो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में हाल ही में हुए संसोधनों ने सामान्य कौवों, चमगादड़ों और चूहों को अनुसूची II के तहत एक संरक्षित श्रेणी में रखा है.
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और भारतीय दंद संहिता के तहत इस संरक्षित सूची में शामिल जीवों को मारने पर कारावास और जुर्माना हो सकता है.
चूहा मारना अपराध है या नहीं यह उन्मूलन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विधि और पशु कल्याण कानूनों की व्याख्या पर निर्भर करता है.
चूहे स्वास्थ्य और संपत्ति के लिए खतरा पैदा करते हैं. ऐसे में इन्हें घर में पनपने नहीं दिया जा सकता है. इसका मतलब ये भी नहीं है कि इनके लिए क्रूर तरीका अपनाया जाएगा.
चूहे से निजात पाने का सबसे बढ़िया तरीका है कि उन्हें ट्रैप में फंसाकर आबादी से दूर छोड़ आना चाहिए.
घर से चूहों को हटाने के लिए कोई भी पशु क्रूरता वाले उपाय नहीं करना चाहिए. चूहे के जाल, ट्रैप जैसे तकरीब के इस्तेमाल का पेटा जैसी संस्था भी वकालत करती है.
हालांकि चूहे मारने के तरीके को लेकर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. दिल्ली जैसे कुछ राज्यों ने तो गोंद के जाल जैसे विशेष रूप से क्रूर तरीकों पर प्रतिबंध भी लगा दिया है.