छोटे बगीचों के लिए वरदान है आम की ये बौनी किस्मे

वैज्ञानिकों ने पूसा आम की किस्में विकसित की हैं, जो कम जगह में भी बंपर पैदावार देती हैं.

इनकी खासियत इनका 'बौनापन' है. इन्हें छोटे बगीचों और सघन बागवानी में आसानी से लगाया जा सकता है.

यह किस्म जुलाई के अंत तक फल देती है. इसका चमकीला लाल-पीला रंग और बौना कद छोटे बगीचों के लिए परफेक्ट है.

पीले और गुलाबी रंग के इस आम को कमरे के तापमान पर भी 10-12 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

इसका छिलका लाल और गूदा संतरे जैसा होता है. यह दशहरी की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक उपज देता है.

नियमित फल देने वाली यह बौनी किस्म न केवल घरेलू बाजार बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात के लिए भी बेहतरीन है.

यह एक नियमित फल देने वाली किस्म है. इसका आकर्षक लाल-पीला रंग देश और विदेश में पसंद किया जाता है.

नारंगी-पीले गूदे वाली यह किस्म स्वाद में बेहद मीठी होती है. इसे 7-8 दिनों तक भंडार किया जा सकता है.

अल्फांसो और टौमी एटकिंस के संकरण से बनी यह किस्म लंबे समय तक खराब नहीं होती.

ये किस्में देर से पकती हैं. जब बाजार में आम कम होते हैं, तब ये किस्में किसानों को अधिक दाम दिलाती हैं.

बौने पेड़ होने के कारण एक ही खेत में ज्यादा पौधे लगाए जा सकते हैं. इससे कम जमीन में मुनाफा बढ़ता है.

चाहे घर का बगीचा हो या छोटा खेत, पूसा की इन आधुनिक किस्मों को अपनाएं और मुनाफे का सौदा बनाएं.